इंडो-यूएस ट्रेड समझौता
पूर्व रक्षा मंत्री व वर्तमान में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत – अमेरिका( इंडो-यूएस ट्रेड) में चल रही व्यापार वार्ता जल्द समझौते का रूप ले लेगी। उन्होंने कहा कि वार्ता सकारात्मकता की ऊंचाई पर है अतःभारत-अमेरिका( इंडो-यूएस ट्रेड) व्यापार वार्ता जल्द ही समझौते में तब्दील हो जाएगी। अमेरिका चाहता है कि उसके स्टूडेंट्स और घुटने के प्रत्यारोपण संबंधी मेडिकल उपकरणों,आईसीटी उत्पाद और डेयरी के लिए भारत प्राइस कैप हटाकर बाजार उपलब्ध कराएं।
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भारत भी अपने घरेलू बाजार को बचाने का प्रयास कर रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अमेरिका के व्यापार घाटे की चिंता का ध्यान रखते हुए भारत उचित और तर्कसंगत समझौता चाहता है ।

अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी में आयोजित व्याख्यान में निर्मला सीतारमण ने कहा भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि व्यापार मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आश्वासन देते हुए कहा कि जल्द ही यह वार्ता किसी बेहतर नतीजे पर पहुंचेगी। आपको बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी फर्स्ट नीति के चलते दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। यहां तक कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को टेरिफिक किंग तक कह डाला था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि सरकार खपत बढ़ाने पर जोर दे रही है। फाइनेंशियल कंपनियों और बैंकों की सहायता से ग्राउंड लेवल पर काम किया जा रहा है। और उसमें सफलता भी मिल रही है। अभिजीत बनर्जी ने हाल ही में कहा था कि इकोनामी संकट से गुजर रही है। आपको बता दें कि अभिजीत बनर्जी ने कहा था कि मौद्रिक स्थायित्व के मुकाबले मांग को बढ़ाना ज्यादा जरूरी है। वित्त मंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से खपत को बल मिलेगा। लोगों को रोजगार मिलेगा जिससे उत्पाद के साथ खपत में भी बढ़ोत्तरी होगी।

